प्रस्तावना

मला कविता करावीशी वाटते , पण जी कविता मला अभिप्रेत आहे , ती कधीच कागदावर अवतरली नाही . ती मनातच उरते , जन्माच्या प्रतीक्षेत ! कारण कधी शब्दच उणे पडतात तर कधी प्रतिभा उणी पडते .म्हणून हा कवितेचा प्रयास सतत करत असतो ...........
तिला जन्म देण्यासाठी , रूप देण्यासाठी ,शरीर देण्यासाठी ......
तिला कल्पनेतून बाहेर पडायचे आहे म्हणून
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Thursday, 12 March 2026

जब दिप जले आना


चित चोर इस फिल्म के उसी गाने से  प्रेरित।

मुखड़ा:
जब दीप जले आना,
जब शाम ढले आना,
संकेत मिलन का भूल न जाना,
मेरा प्यार न बिसराना।

अंतरा १:
वो चाँद फ़लक पर तेरी राह ताक रहा,
चाँदनी उसी की है, फिर क्यों तुम्हें देख रहा?
छत पर आकर न देना तुम उसे रुप का नजराना।

मुखड़ा (दोहराव):
जब दीप जले आना,
जब शाम ढले आना,
संकेत मिलन का भूल न जाना,
मेरा प्यार न बिसराना।

अंतरा २:
तेरी ही आँखों में छुपे हैं मेरे सपने सारे,
हर शाम याद आते हैं बिते पल हमारे।
यादों से दिल अब भरता नहीं,
तुम ही मिलने आना।

मुखड़ा (दोहराव):
जब दीप जले आना,
जब शाम ढले आना,
संकेत मिलन का भूल न जाना,
मेरा प्यार न बिसराना।

अंतरा ३:
इन हवाओं में महके तेरी ही खुशबू,
हर तरफ़ मुझे बस तेरी ही जूस्तजू।
तुम बिन दिल कहीं लगता नहीं,
बहलाने दिल को मेरे तुम आना।

मुखड़ा (दोहराव):
जब दीप जले आना,
जब शाम ढले आना,
संकेत मिलन का भूल न जाना,
मेरा प्यार न बिसराना।
गुरुवार, १२/३/२६ , ९:५० PM
अजय सरदेसाई -मेघ


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