प्रस्तावना

मला कविता करावीशी वाटते , पण जी कविता मला अभिप्रेत आहे , ती कधीच कागदावर अवतरली नाही . ती मनातच उरते , जन्माच्या प्रतीक्षेत ! कारण कधी शब्दच उणे पडतात तर कधी प्रतिभा उणी पडते .म्हणून हा कवितेचा प्रयास सतत करत असतो ...........
तिला जन्म देण्यासाठी , रूप देण्यासाठी ,शरीर देण्यासाठी ......
तिला कल्पनेतून बाहेर पडायचे आहे म्हणून
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Wednesday, 26 August 2026

जरुरी तो नहीं।



तुम भी मुझसे प्यार करो, ये ज़रूरी तो नहीं,
मगर मुझसे नफ़रत करो, ये भी ज़रूरी तो नहीं।

हर मोड़ पे मेरे साथ ही चलो, ये ज़रूरी तो नहीं,
बस राहों में तन्हा छोड़ो, ये भी ज़रूरी तो नहीं।

सुना है दर्द बाँटने से दर्द कम हो जाता है,
तुम मेरे ग़म में भी घिरो, ये ज़रूरी तो नहीं।

कभी तन्हाई में याद आ जाऊँ अगर मैं,
तो आँख भर के रो लो, ये ज़रूरी तो नहीं।

तेरा बसेरा मेरे दिल में है, ये जानते हैं सभी,
मेरा बसेरा तेरे दिल में हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

मेरी चाहत का कोई हक़ नहीं तुम पर, ऐ हमदम,
बस मेरी चाहत से खफ़ा हो, ये ज़रूरी तो नहीं।

मंगलवार, २६/८/२६ , १२:१५ PM
अजय सरदेसाई -मेघ