अपनी एक और मुलाक़ात ज़रूरी है अभी,
अपनी और गहरी पहचान ज़रूरी है अभी।
अजनबियों से प्यार यूं ही कभी करते नहीं,
अपना थोड़ा और परिचय होना ज़रूरी है अभी।
दिल की बातें लफ़्ज़ों में कहां आती हैं सदा,
कुछ ख़ामोशी का भी बयान ज़रूरी है अभी।
फूल यूं ही नहीं खिलते बस मौसम के आने से,
प्यार की थोड़ी बरसात ज़रूरी है अभी।
अपनी एक और मुलाक़ात ज़रूरी है अभी,
अपनी और गहरी पहचान ज़रूरी है अभी।
रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद मंज़िल नहीं बन जाते कभी,
साथ चलने का इरादा ज़रूरी है अभी।
चाहें कितनी भी हों, वक़्त मांगती है ये राह,
थोड़ा सब्र, थोड़ी बात ज़रूरी है अभी।
तुम बस मुझसे अभी प्यार का वादा लो,
और कुछ नहीं, प्यार का इत्मीनान तो हो अभी।
अपनी एक और मुलाक़ात ज़रूरी है अभी,
अपनी और गहरी पहचान ज़रूरी है अभी।
शनिवार, १८/७/२६। , ११:०० AM
अजय सरदेसाई -मेघ
