ये दीवानगी मेरी फ़ितरत में नहीं,
तेरी आरज़ू ने ही इसे है उभारा,
यूँ तो मैं हमेशा "फंटूश" कहलाता रहा,
आज हर नज़र में हूँ, बस दीवाना तेरा।
तेरी आरज़ू ने ही इसे है उभारा,
यूँ तो मैं हमेशा "फंटूश" कहलाता रहा,
आज हर नज़र में हूँ, बस दीवाना तेरा।
न चाँद की चाहत, न सितारों की तलब,
तेरी गली ही बस ठिकाना हो मेरा,
पूछे गर कोई जो मुझसे पहचान मेरी,
मैं कहूँगा बस इतना, हूँ दीवाना तेरा।
तेरी एक नज़र से हुआ है ये असर,
ख़्वाबों में हूँ, न जागा शामो-सहर,
दुनिया की भीड़ में भी हूँ सबसे जुदा,
बस एक ही नाम मेरा, दीवाना तेरा।
बुधवार, ८/१०/२६ , १२:३७ PM
अजय सरदेसाई -मेघ
