एक ज़माना गुज़र गया हमको मिले हुए,
दिल में मगर अभी वो यादें बाकी हैं।
दिल में मगर अभी वो यादें बाकी हैं।
अब पाने की चाहत नहीं रही मगर,
तुमसे मिलने की आरज़ू बाकी है।
धीरे-धीरे उम्र अब ढल रही है मगर,
तेरा जाना दिल से अभी बाकी है।
डरता हूँ कि फिर से जन्म न लेना पड़े,
क्योंकि तुमसे मिलने की हसरत बाकी है।
हम कॉलेज में मिला करते थे, वो भी क्या ख़ूबसूरत दिन थे,
उन दिनों की कुछ सौग़ातें तुम्हें वापस करना बाकी है।
बुधवार, २३/९/२६ , ७:३० PM
अजय सरदेसाई -मेघ
