तू कहे तो तेरे नाम मेरी ज़िंदगी लिखकर दूँ,
तू मेरी ज़िंदगी है, तुम्हीं को तुम्हें लिखकर दूँ।
सभी कुछ तेरा है, और मैं भी तो तुम्हारा हूँ,
अब इसके सिवा और क्या तुम्हें लिखकर दूँ।
ये ज़मीन ये आसमान ये वादियाँ हसीं तुम्हीं से हैं,
कहो तो एक बार क्या ये सभी तुम्हें लिखकर दूँ।
तस्कीन गर मुहब्बत में है तो वो तुम्हीं से है,
मुस्कुरा दो एक बार तो ये तस्कीन तुम्हें लिखकर दूँ।
तुम रब हो मेरे, तुम्हीं से वजूद है मेरा,
प्यार से देखो मुझे, तुम्हें ख़ुदा लिखकर दूँ।
'मेघ' कहते हैं मुझे, मुझसे बारिशों की रवानी है,
तुम रअद बन जाओ तो तुम्हें बरसात लिखकर दूँ
बुधवार, २३/९/२६ , ०१:०८ PM
अजय सरदेसाई -मेघ
रअद = बादल की गरज

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