प्रस्तावना

मला कविता करावीशी वाटते , पण जी कविता मला अभिप्रेत आहे , ती कधीच कागदावर अवतरली नाही . ती मनातच उरते , जन्माच्या प्रतीक्षेत ! कारण कधी शब्दच उणे पडतात तर कधी प्रतिभा उणी पडते .म्हणून हा कवितेचा प्रयास सतत करत असतो ...........
तिला जन्म देण्यासाठी , रूप देण्यासाठी ,शरीर देण्यासाठी ......
तिला कल्पनेतून बाहेर पडायचे आहे म्हणून
....

Monday, 25 December 2023

सिर्फ चांदनी रह जाएंगी



हात में फिर भी मेरे यह बेड़ियाँ रह जाएंगी ।  

तेरे बाद भी दिल में तेरी यादें रह जाएंगी ।। १ ।।


मुम्किन ये भी है के मैं एक दिन भुल जाऊंगा तुम्हें ।

यहाँ फिर भी अपने प्यार कि निशानियाँ रह जाएंगी ।। २ ।।

  

मै जानता हूं के तुझे मुझसे अब कोई नाराज़गी नहीं ।   

तिरी तीखीं नजरों की फिर भी तल्खियां तो रह जाएंगी ।। ३ ।।


हम तिरी ऑंखो में जानम इस कदर दूब जाएंगे ।

के हमारे होने की न कोई निशानियाँ रह जाएंगी ।। ४ ।।

  

इश्क में अपने फांसकर मार ही डाला आपने मुझे ।  

मुर्दा तो तैयार है,जनाजे कि तैयारियॉँ बस रह जाएंगी ।। ५ ।।


ऐ मेरी दिल-ए-जानाँ न तु यु मुझे बर्बाद कर।

तेरी बद-सलुखी की फिर कहानियाँ रह जाएंगी ।। ६ ।।


आप अगर अब मिलने को ना आए तो हम रुठ जाएंगे  ।

ये न हो के माहताब गुम हो और सिर्फ चांदनी रह जाएंगी ।। ७  ।।


ज़रा सा तो बहल जाने दे मेरे इस दिल-ए-नादाँ को ।

ये न हो के दिल टुटने कि बस आवाजें ही रह जाएंगी ।। ८ ।।

 



रविवार , दिनांक २४ दिसंबर २०२३ , ९:५०  PM
अजय सरदेसाई (मेघ)

No comments:

Post a Comment