हम तो हर इम्तिहान से गुज़रे हैं,
तू हमें और आज़माने की कोशिश न कर।
तू हमें और आज़माने की कोशिश न कर।
ज़िंदगी ख़ुद ही एक आज़माइश है,
तू जीना सिखाने की कोशिश न कर।
हर सफ़र की धूप से वाकिफ हैं हम,
तू हमें साया दिखाने की कोशिश न कर।
दर्द अपना हमने ख़ुद ही सह लिया है,
तू मरहम लगाने की कोशिश न कर।
हर सवाल का जवाब हम दे चुके हैं,
तू फिर से सुनाने की कोशिश न कर।
इस जहान के लिए कब से फ़ना हो चुके हम,
तू हमें वापस बुलाने की कोशिश न कर।
शनिवार, ११/७/२६ , ९:५० AM
अजय सरदेसाई -मेघ

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