स्थायी: ( मुखड़ा)
ओ रे पिया, पिया, ओ मोरे पिया
जा रे, जा रे, तू जा रे मोरे पिया॥
ओ रे पिया, पिया, ओ मोरे पिया
जा रे, जा रे, तू जा रे मोरे पिया॥
( दुल्हन - अंतरा १)
सेहरा उतरा ना था अभी तक,
बजी रणभेरी रे।
मेहंदी का रंग अभी ना उतरा,
कर्तव्य के आगे प्रेम भी हारे॥
(दुल्हा अंतरा २)
धीरज धर तू, साहस रखियो,
मन में मिलन की आस धरे।
जीत के लौटूँ, वचन है मेरा,
मिलन की आस कभी ना हारे॥
( दुल्हन अंतरा ३)
देश-धरम का बुलावा माना,
शीश झुकाया रे।
बाट जोहूँ मैं, दिन गिनूँ पल-पल,
प्रतीक्षा के आगे समय भी हारे॥
( दुल्हा-दुल्हन अंतरा ४)
जनम-जनम का साथ हमारा,
फिर मिलेंगे रे।
प्रेम लौटे फिर जनम लेकर,
प्रेम के आगे नियति भी हारे॥
बुधवार, ८/७/२०२६ , ०१:१० PM
अजय सरदेसाई -मेघ

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