अकेले में रोना मुझे रास आता है,
सबको साथ लेकर हँसना रास आता है।।
सबको साथ लेकर हँसना रास आता है।।
मैख़ाने में साग़रों की कमी तो नहीं मगर,
मुझे तेरी आँखों से पीना रास आता है।।
सरायों में शायद लज़ीज़ खाना मिलता होगा,
मगर मुझे घर का खाना ही रास आता है।।
बहुत लोग मिलते हैं मतलब से इस जहाँ में,
मुझे बेवजह किसी का मिलना रास आता है।।
"मेघ" दुनिया का अंदाज़-ए-ज़िस्त अलग हो मगर,
मुझे तो अपना अंदाज़-ए-ज़िस्त रास आता है।।
गुरुवार, १४/५/२६, ११:२२ AM
अजय सरदेसाई - मेघ

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