Saturday, 7 February 2026

दूर होते रहे


तेरी आगोश-ए-याद में रात भर रोते रहे,

सुबह हुई फिर भी उसी ख़ुमार में सोते रहे।


        उम्र भर तलाश-ए-मंज़िल की होती रही,

        तुम ही मंज़िल थे, तेरी तलाश में फिरते रहे।


राह-ए-इश्क़ बड़ी पेचीदा थी, सनम,

तुम तक पहुँचने को दर-ब-दर भटकते रहे।


        कारवाँ-ए-इश्क़ सामने से गुज़र गया,

        हम खाली हाथ बस खड़े देखते रहे।


फ़लक पर चाँद के दीदार सबको हुए,

हम अपने चाँद के दीदार को तरसते रहे।


        मेघ’ किस्मत की धूप में यूँ जलते रहे क्या कहें,

        वो ख़्वाबो में पास, हकिकत में हमसे दूर होते रहे।

 

शुक्रवार, ३०/१/२६ ,१२:४५ PM

अजय सरदेसाई -मेघ


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