Wednesday, 3 September 2025

ग़ज़ल : दिल की ख्वाहिश आज पूरी हो जाए


 

मतला:
दिल की ख्वाहिश आज पूरी हो जाए।
मैं तेरा, तू मेरी हो जाए।।

शेर 2:
चाँद तारों की गवाही भी साथ हो जाए।
आज की रात कोई नई कहानी हो जाए।।

शेर 3:
तिरे सीने से लगकर दिल की धड़कन सुन लूँ।
ये तड़प ख़त्म हो, दिल को आराम हो जाए।।

शेर 4:
तिरे लबों की शबनम मैं पी लूँ।
तिरी आँखों का काजल बादल बन जाए।।

मक़ता:
ज़िन्दगी भर की तलाशें ठहर जाऍं।
'मेघ', ये दुआ है कि ये दुआ कबूल हो जाए।।

बुधवार, ३/९/२५ ,४:०८ PM
अजय सरदेसाई -मेघ

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