Tuesday, 16 September 2025

दिल-अज़ारी आपकी


 

मतला:

दिल के बदले दिल देते हो, साहुकारी आपकी।

आज के बाद हम भी करेंगे, तरफदारी आपकी।।

 

शेर २:

ऑंखों में सिमट लिया,वल्लाह, गिरफ़्तारी आपकी।

हिज़्र की रातों में देखी न जाए, बेकरारी आपकी।।

 

शेर ३:

आप से सिखे हमने जिंदगी के फलसफे।

आप ही से सिखी दिल-अज़ारी आपकी।।

 

शेर ४:

आपका नाम लिया तो रौशन शाम हो गई।

रात रात भर हम जागे,चाँदकारी आपकी।।

 

मक़ता:

मेघ कहता है इस ग़ज़ल में, है आपका ही असर।

शेरों में लफ़्ज़ मीरे है जरूर, शाइरी आपकी।।

 

सोमवार, १५/९/२५ , ९:०५ PM

अजय सरदेसाई -मेघ  

 

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