Tuesday, 29 July 2025

ग़ज़ल :मुमकिन ये भी नहीं


मतला:

कोई हसीं हो तुम जैसा,ये तो बहुत मुश्किल है मगर I

हम जैसा कोई आशिक़ हो,मुमकिन ये भी नहीं II

 

उस पर्दानशीं को बेपर्दा करना बहुत मुश्किल है मगर I

उसका इंतजार न हो ,मुमकिन ये भी नहीं II

 

चांदनी फलक पर न हो ,ये तो बहुत मुश्किल है मगर I 

तुम तस्सवुर में न रहो ,मुमकिन ये भी नहीं II

 

ज़िन्दगी कट जाये तुम बिन ,ये तो बहुत मुश्किल है मगर I

बिना इश्क़ किये हम फ़ना हो ,मुमकिन ये भी नहीं II

 

मक़्ता:

'मेघये ग़ज़ल उस तक न पहुंचे, ये तो बहुत मुश्किल है मगर I

तिरे दर्द से वो वाक़िफ़ न हो ,मुमकिन ये भी नहीं  II

 

मंगलवार , २९/७/२५ , ०२:३० PM

अजय सरदेसाई - मेघ

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