Tuesday, 13 January 2026

यादों के दरीचे


तिरे जानिब से न कोई निशां मिला

यादों की दरिचों में बस टूटा सामान मिला।।

 

टूटीफूटी ख्वाहिशों के अंबार पर

किसी गैर के ख्वाब का आशियां मिला।।

 

जबीं को झुकाया तेरी राह में मैंने

तड़प फिर भी रही, न मुझे ठिकाना मिला।।

 

दिल का परिंदा छटपटा रहा बेहाल।

उम्र भर उसे कोई कारवां न मिला।।

 

राब्ता उमिदों का दिल की गलियों में अब नहीं।

उस रास्ते का मुसाफ़िर जो भी मिला, अंजान मिला।।

 

सोमवार, १२/१/२६ ०४:३३ PM

अजय सरदेसाई -मेघ


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