Thursday, 1 January 2026

वक्त ने किया ये कैसा सितम


वक्त ने किया ये कैसा सितम,
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम।


बेकरार दिल ढूँढता है वे पल,
जो गुम हुए कहीं, कभी थे हमक़दम।


दिल उदास है, फिर भी एक आस है,
ज़िंदगी मिले कहीं किसी राह बाक़दम।


जाएँगे कहाँ—कुछ सूझता नहीं,
चल पड़े मगर बढ़ते हुए क़दम।


क्या तलाश है, क्या प्यास है—कुछ पता नहीं,
उम्र ढल रही ,यूँ ही हर दम-ब-दम।


गुरुवार, १/१/२६ | १:४५ PM
अजय सरदेसाई — मेघ

No comments:

Post a Comment